लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
संयुक्त (Joint) प्रॉपर्टी को लेकर भारत में विवाद और धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। कई बार एक सह-मालिक अन्य मालिकों की जानकारी या सहमति के बिना पूरी संपत्ति बेचने की कोशिश करता है, जिससे खरीदार और अन्य मालिक दोनों मुश्किल में पड़ जाते हैं।
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, संयुक्त संपत्ति में प्रत्येक सह-मालिक का पूरे प्रॉपर्टी पर अधिकार होता है, लेकिन बिना सहमति पूरी संपत्ति बेचना सामान्य रूप से मान्य नहीं माना जाता। सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न कानून विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा सौदा तभी वैध होता है जब सभी सह-मालिक सहमत हों या संपत्ति का कानूनी बंटवारा (partition) हो चुका हो।
हालांकि, एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कोई सह-मालिक अपनी हिस्सेदारी (undivided share) को बेच सकता है, लेकिन वह पूरी संपत्ति को अकेले बेचने का अधिकार नहीं रखता। ऐसे मामलों में खरीदार को केवल उसी हिस्से का अधिकार मिलता है, पूरी संपत्ति का नहीं।
अगर कोई व्यक्ति बिना सहमति के संयुक्त संपत्ति बेचता है, तो अन्य सह-मालिक कोर्ट में जाकर रोक (injunction) लगवा सकते हैं और बिक्री को चुनौती दे सकते हैं। कई मामलों में ऐसे लेनदेन को अवैध भी घोषित किया जा सकता है।
ठगी से बचने के लिए क्या करें?
- खरीदने से पहले सभी सह-मालिकों की लिखित सहमति जरूर देखें
- प्रॉपर्टी का टाइटल और हिस्सेदारी की जांच करें
- म्यूटेशन और रजिस्ट्री दस्तावेजों को वेरिफाई करें
- अगर बंटवारा नहीं हुआ है तो विशेष सावधानी रखें
- शक होने पर कानूनी सलाह जरूर लें
विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर विवाद अधूरी जानकारी और दस्तावेजों की ठीक से जांच न करने की वजह से होते हैं। इसलिए संयुक्त संपत्ति में निवेश से पहले पूरी कानूनी जांच बेहद जरूरी है।