लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
भारतीय सेना अगले महीने अपने पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (IBGs) को स्थापित और संचालन में लाने जा रही है। यह सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत पारंपरिक सैन्य ढांचे की जगह अधिक चुस्त, आत्मनिर्भर और तेज़ प्रतिक्रिया देने वाली ब्रिगेड आकार की लड़ाकू इकाइयों को तैयार किया जाएगा, जिन्हें विशेष रूप से पर्वतीय इलाकों में तेजी से तैनात किया जा सकेगा।
ये पहले IBGs पश्चिम बंगाल के पानागढ़ स्थित XVII माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स के अंतर्गत बनाए जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी चीन सीमा से जुड़े क्षेत्रों की सुरक्षा है। पहले इन्हें सितंबर तक शुरू करने की योजना थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाकर 1 जुलाई से लागू करने की तैयारी की गई है।
मौजूदा योजना के अनुसार XVII माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स के तहत चार इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स और एक फायर सपोर्ट ग्रुप का गठन किया जाएगा। प्रत्येक ग्रुप का नेतृत्व मेजर जनरल रैंक का अधिकारी करेगा। इन इकाइयों में पैदल सेना, तोपखाना, इंजीनियरिंग, संचार, चिकित्सा और लॉजिस्टिक्स जैसी विभिन्न सैन्य क्षमताओं को एकीकृत किया जाएगा, जिससे युद्ध के दौरान अलग-अलग इकाइयों पर निर्भरता कम होगी और त्वरित कार्रवाई संभव होगी।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि IBG प्रणाली से भारतीय सेना की परिचालन क्षमता में बड़ा सुधार होगा। विशेष रूप से चीन सीमा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी आपात स्थिति के दौरान सेना पहले की तुलना में अधिक तेजी और प्रभावशीलता के साथ जवाब दे सकेगी। यह सैन्य सुधार भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना की युद्धक क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।