लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
तेहरान/वॉशिंगटन: हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में हालिया तनाव की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का अनुच्छेद-5 बन गया है। इस अनुच्छेद में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का प्रावधान है, लेकिन इसके क्रियान्वयन और नियंत्रण को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग व्याख्या ने नए टकराव को जन्म दे दिया।
ईरान का कहना है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही का नियंत्रण उसके अधिकार क्षेत्र में आता है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग मानते हुए सभी देशों के जहाजों के निर्बाध आवागमन की वकालत करता है। इसी मतभेद के चलते हाल के दिनों में सैन्य गतिविधियां तेज हुईं और दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, अनुच्छेद-5 की अस्पष्ट भाषा ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। समझौते में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का अंतिम अधिकार किसके पास होगा। इस अस्पष्टता के कारण समुद्री यातायात प्रभावित हुआ, कई जहाजों ने वैकल्पिक मार्ग अपनाए और वैश्विक तेल बाजार में भी अनिश्चितता बढ़ गई।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव केवल क्षेत्रीय सुरक्षा ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। दोनों देशों के बीच आगे की वार्ता पर अब पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।