लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
बीजिंग: चीन ने वर्षों बाद परमाणु क्षमता वाली लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है। रिपोर्टों के अनुसार, यह मिसाइल एक परमाणु-संचालित पनडुब्बी से प्रशांत महासागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र की ओर दागी गई। चीन ने इसे नियमित सैन्य प्रशिक्षण का हिस्सा बताया है और कहा है कि परीक्षण के दौरान मिसाइल में वास्तविक परमाणु वारहेड नहीं था।
इस परीक्षण के बाद अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड और ताइवान सहित कई देशों ने चिंता व्यक्त की है। इन देशों का कहना है कि इस तरह के परीक्षण क्षेत्रीय सुरक्षा और सामरिक स्थिरता पर असर डाल सकते हैं। कुछ देशों ने यह भी कहा कि इस तरह की गतिविधियों में अधिक पारदर्शिता और पर्याप्त पूर्व सूचना दी जानी चाहिए।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह परीक्षण चीन की समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Sea-based Nuclear Deterrence) को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि परीक्षण में लंबी दूरी की JL-3 श्रेणी की बैलिस्टिक मिसाइल का उपयोग किया गया, हालांकि चीन ने आधिकारिक तौर पर मिसाइल के मॉडल की पुष्टि नहीं की है।
विश्लेषकों का मानना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा के बीच इस परीक्षण ने एक बार फिर वैश्विक सुरक्षा और हथियारों की होड़ को लेकर बहस तेज कर दी है। फिलहाल चीन का कहना है कि उसका सैन्य आधुनिकीकरण किसी विशेष देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है, जबकि क्षेत्रीय देश घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।