लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
10 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) की पहल से देशभर के 28 नए उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication-GI) का दर्जा मिला। इन नए पंजीकरणों के साथ NABARD द्वारा समर्थित GI उत्पादों की कुल संख्या 176 हो गई है।
भारत में GI पंजीकरण Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Act, 1999 के तहत किया जाता है। इसका उद्देश्य उन उत्पादों की पहचान और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिनकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशेषता किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है। GI का पंजीकरण Geographical Indications Registry द्वारा किया जाता है, जो पेटेंट, डिजाइन एवं ट्रेडमार्क के महानियंत्रक (CGPDTM) के अधीन कार्य करता है।
नए GI टैग प्राप्त उत्पादों में पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा वस्त्र, बांस शिल्प, धातु शिल्प, मिट्टी के शिल्प, चित्रकला और पारंपरिक वाद्ययंत्र शामिल हैं। GI टैग कृषि उत्पादों, खाद्य पदार्थों, हस्तशिल्प और पारंपरिक निर्माण तकनीक से जुड़े उत्पादों की विशिष्ट पहचान बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नए GI उत्पादों में बिहार की नालंदा बावनबूटी साड़ी एवं फैब्रिक्स और गया पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट, झारखंड की कुचाई सिल्क साड़ी, असम का बा शिल्प (बांस शिल्प) और बिहू पेपा, हिमाचल प्रदेश की वुड कार्विंग क्राफ्ट तथा मध्य प्रदेश की खजुराहो मेटल क्राफ्ट प्रमुख हैं। GI टैग मिलने से इन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।