दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्रकार रजत शर्मा से जुड़े डीपफेक वीडियो के मामले में सोशल मीडिया मंचों Meta और YouTube को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत ने रजत शर्मा से संबंधित फर्जी और भ्रामक वीडियो को हटाने को कहा है।
मामले में डीपफेक तकनीक के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई गई है। डीपफेक के जरिए किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या वीडियो को इस तरह बदला जा सकता है कि वह वास्तविक दिखाई दे, जबकि उसका मूल कंटेंट से कोई संबंध नहीं होता।
अदालत के निर्देश के बाद Meta और YouTube पर मौजूद संबंधित सामग्री को हटाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। यह मामला सोशल मीडिया मंचों पर फर्जी वीडियो और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के गलत इस्तेमाल को लेकर बढ़ती कानूनी चुनौतियों को भी सामने लाता है।
डीपफेक वीडियो के जरिए किसी व्यक्ति की छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है। खासकर सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के मामले में ऐसे वीडियो तेजी से वायरल होने के कारण विवाद और भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
रजत शर्मा से जुड़े इस मामले में हाई कोर्ट के निर्देश को डिजिटल मंचों पर फर्जी और भ्रामक सामग्री के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, यह मामला सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी और डीपफेक सामग्री पर त्वरित कार्रवाई की जरूरत को भी रेखांकित करता है।