लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित ताजमहल को प्रेम का सबसे खूबसूरत प्रतीक माना जाता है, लेकिन इसकी नींव एक गहरे दुख और बिछड़ने की कहानी से जुड़ी है। मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी प्रिय बेगम मुमताज़ महल की याद में इस अद्भुत स्मारक का निर्माण करवाया था।
इतिहास के अनुसार, मुमताज़ महल का निधन वर्ष 1631 में अपने 14वें बच्चे को जन्म देते समय हुआ था। उनकी असमय मृत्यु से शाहजहां गहरे सदमे में चले गए। कहा जाता है कि इसी दुख ने उन्हें अपनी बेगम की याद में एक ऐसा मकबरा बनवाने की प्रेरणा दी, जो आज दुनिया के सात अजूबों में शामिल है।
ताजमहल के निर्माण में हजारों कारीगरों और शिल्पकारों ने वर्षों तक काम किया। सफेद संगमरमर से बने इस स्मारक की नक्काशी, वास्तुकला और कलात्मक डिजाइन इसे विश्वभर में विशिष्ट पहचान दिलाते हैं।
आज ताजमहल न केवल प्रेम का प्रतीक है, बल्कि भारतीय इतिहास, मुगल वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत का भी अनमोल हिस्सा है। हर साल लाखों देशी और विदेशी पर्यटक इस ऐतिहासिक धरोहर को देखने आगरा पहुंचते हैं।