लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी संकट ने वैश्विक बाजारों में दहशत पैदा कर दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि WTI crude भी तेज उछाल पर बना हुआ है।
होर्मुज दुनिया का सबसे अहम तेल समुद्री मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक समुद्री तेल सप्लाई का करीब 20% गुजरता है। ईरान और अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच इस रूट पर संकट गहराने से दुनिया भर की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित होने लगी है।
अब NATO की संभावित एंट्री को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर आने वाले हफ्तों में होर्मुज पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ, तो NATO सदस्य देशों के बीच समुद्री मिशन पर विचार हो सकता है। हालांकि फिलहाल NATO ने आधिकारिक तौर पर किसी मिशन की पुष्टि नहीं की है और इसके लिए सभी सदस्य देशों की सहमति जरूरी बताई गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर संकट लंबा चला तो तेल 120 डॉलर या उससे ऊपर भी जा सकता है। कई देशों में ईंधन महंगा होने, शिपिंग लागत बढ़ने और सप्लाई चेन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका फिर सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है, जबकि ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी नए हमले का जवाब “नए मोर्चों” से दिया जाएगा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो इसका असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक महंगाई, शेयर बाजार और आम लोगों की जेब पर भी पड़ेगा।