लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
खेल विश्वविद्यालय, राई में बुधवार को “उच्च प्रदर्शन में अनुप्रयुक्त खेल शरीर क्रिया विज्ञान” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार के लिए खेल विज्ञान के सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप में समझाना और उन्हें मैदान स्तर पर लागू करने की जानकारी देना था।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. नेहा कक्कड़ ने कहा कि खेल प्रदर्शन को बेहतर बनाने में फिजियोलॉजिकल मॉनिटरिंग की अहम भूमिका होती है। उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला की अवधारणाओं और मैदान में उनके उपयोग के बीच की दूरी को समझना और उसे कम करना जरूरी है।
पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने शरीर विज्ञान की मूल अवधारणाएं, प्रयोगशाला और फील्ड परीक्षण, वीओ₂ मैक्स, एनारोबिक क्षमता, सबमैक्सिमल अनुकूलन, रिकवरी रिस्पॉन्स, लैक्टेट थ्रेशोल्ड और हार्ट रेट मॉनिटरिंग जैसे विषयों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने खिलाड़ियों और कोचों को इन वैज्ञानिक मापदंडों को नियमित प्रशिक्षण का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अपने सवाल रखे और विशेषज्ञों ने उनका संतोषजनक समाधान किया।
कार्यक्रम के दौरान कुलपति अशोक कुमार ने मुख्य वक्ता को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. नेहा कक्कड़ के अनुभव से खिलाड़ियों को नई दिशा मिलेगी और फिजियोलॉजी का ज्ञान प्रदर्शन सुधार का आधार है।
उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से खिलाड़ियों के प्रदर्शन का स्व-मूल्यांकन भी संभव हो गया है, जिससे प्रशिक्षण और अधिक प्रभावी बन सकता है।
इस अवसर पर डीन शारीरिक शिक्षा एवं खेल योगेश चंद्र, डीन स्पोर्ट्स साइंस विवेक कुमार सिंह, वरिष्ठ सलाहकार खेल आर.पी. गर्ग सहित शिक्षण और कोचिंग स्टाफ मौजूद रहा। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. गोपाल द्वारा किया गया।