लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
Buldhana और Burhanpur से जुड़े इस मामले ने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस युवती को मृत मानकर उसके पिता और भाई को हत्या के आरोप में जेल भेज दिया गया था, वह अचानक जिंदा मिल गई।
मामला तब शुरू हुआ जब महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में एक सिर कटी और आंशिक रूप से जली हुई महिला की लाश मिली। जांच के दौरान पुलिस ने इसे मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले की लापता युवती शिवानी कलमेकर की लाश मान लिया।
इसके बाद पुलिस ने शिवानी के पिता बापुराम कलमेकर और भाई अजय कलमेकर को गिरफ्तार कर लिया। जांच अधिकारियों का दावा था कि पूछताछ के दौरान दोनों ने हत्या की बात स्वीकार की थी। इसी आधार पर दोनों को जेल भेज दिया गया।
लेकिन पूरे मामले में नाटकीय मोड़ तब आया जब शिवानी खुद जिंदा हालत में पुलिस स्टेशन पहुंच गई। उसने पुलिस को बताया कि वह सुरक्षित है और उसके साथ कुछ भी गलत नहीं हुआ। उसने अपने पिता और भाई को रिहा करने की मांग भी की।
जांच में सामने आया कि शिवानी अपने परिचित अरुण कलमेकर के साथ महाराष्ट्र के नासिक इलाके में रह रही थी। दोनों के परिवारों ने उनके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में पुलिस ने दोनों को खोज निकाला।
अब सबसे बड़ा सवाल कथित कबूलनामे को लेकर उठ रहा है। यदि शिवानी जिंदा थी तो उसके पिता और भाई ने हत्या स्वीकार क्यों की? पुलिस सूत्रों के अनुसार यह जांच का विषय है कि कथित स्वीकारोक्ति किन परिस्थितियों में हुई और क्या पहचान प्रक्रिया में गंभीर चूक हुई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने जली हुई लाश की पहचान बिना अंतिम डीएनए पुष्टि के शिवानी के रूप में मान ली थी। इसी वजह से अब जांच एजेंसियों पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।
मामले के सामने आने के बाद पुलिस को अब एक और बड़ी पहेली सुलझानी है—आखिर जंगल में मिली वह जली हुई लाश किसकी थी? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए जांच फिर से शुरू कर दी गई है।
इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है और कई लोग गलत गिरफ्तारी तथा जांच प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।