लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
Arvind Panagariya ने रुपये की गिरती कीमत को लेकर Reserve Bank of India को बड़ा सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले 100 रुपये का स्तर सिर्फ “एक नंबर” है और RBI को इस मनोवैज्ञानिक आंकड़े को बचाने के लिए जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष पनगढ़िया ने कहा कि मौजूदा हालात में रुपये को धीरे-धीरे कमजोर होने देना बेहतर रणनीति हो सकती है। उनके मुताबिक अगर RBI लगातार विदेशी मुद्रा भंडार खर्च कर रुपये को बचाने की कोशिश करेगा, तो इससे देश के forex reserves पर दबाव बढ़ेगा।
उन्होंने कहा, “100 सिर्फ एक संख्या है, जैसे 99 या 101।” पनगढ़िया के अनुसार नीति निर्माण किसी मनोवैज्ञानिक स्तर के डर से नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि तेल संकट अगर लंबा चला तो रुपये पर दबाव बना रहेगा और अंततः depreciation को स्वीकार करना पड़ेगा।
हाल के दिनों में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। एक समय रुपया 96.95 प्रति डॉलर तक फिसल गया, हालांकि बाद में RBI के हस्तक्षेप और कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी के बाद इसमें कुछ सुधार देखने को मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट, महंगे कच्चे तेल, विदेशी निवेश की निकासी और वैश्विक अनिश्चितता के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अगर मौजूदा हालात जारी रहे तो रुपया 100 प्रति डॉलर के स्तर के करीब पहुंच सकता है।
पनगढ़िया ने डॉलर बॉन्ड या NRI deposits जैसे विकल्पों को “अस्थायी राहत” बताते हुए कहा कि लंबे समय में बाजार आधारित adjustment ही ज्यादा टिकाऊ समाधान होगा।