लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस आज दुनिया की सबसे चर्चित रक्षा प्रणालियों में शामिल है। इसकी तेज रफ्तार, सटीक निशाना साधने की क्षमता और युद्ध में प्रभावी प्रदर्शन के कारण कई देश इसे खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। भारत इसे केवल व्यापार के लिए नहीं, बल्कि अपनी रक्षा कूटनीति, रणनीतिक साझेदारी और रक्षा निर्यात को मजबूत करने के उद्देश्य से भी मित्र देशों को उपलब्ध करा रहा है।
ब्रह्मोस का विकास भारत की BrahMos Aerospace और रूस की NPO Mashinostroyenia के संयुक्त उपक्रम के तहत हुआ था। इसी वजह से मिसाइल में दोनों देशों की तकनीक शामिल है। यदि किसी तीसरे देश को ब्रह्मोस का निर्यात किया जाता है, तो यह प्रक्रिया दोनों साझेदारों के बीच हुए समझौतों और निर्यात नियमों के अनुसार होती है। इसलिए कई मामलों में रूस की सहमति या अनुबंध संबंधी मंजूरी आवश्यक हो सकती है।
भारत पहले ही फिलीपींस के साथ ब्रह्मोस निर्यात समझौता कर चुका है, जबकि इंडोनेशिया समेत कई अन्य देशों के साथ भी रक्षा सहयोग और संभावित सौदों पर बातचीत चल रही है। इन सौदों का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग बढ़ाना, मित्र देशों की रक्षा क्षमता मजबूत करना और भारत को वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित करना है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस का निर्यात केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है। इससे भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति मजबूत होती है, 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा मिलता है और रक्षा उद्योग में नई संभावनाएं खुलती हैं। साथ ही, भारत अपने भरोसेमंद रक्षा साझेदार की छवि को भी मजबूत कर रहा है।