लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
अमेरिकी फुटबॉल खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन के रेड कार्ड से जुड़े मामले ने फीफा वर्ल्ड कप के दौरान बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में FIFA अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से फोन पर बात की थी, जिसके बाद खिलाड़ी पर लगा एक मैच का प्रतिबंध हटा दिया गया।
मामला तब शुरू हुआ जब बालोगुन को बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ मैच में रेड कार्ड मिला था। नियमों के अनुसार उन्हें अगले मैच से बाहर रहना था। ट्रंप ने इस फैसले को गलत बताते हुए FIFA से मामले की समीक्षा करने का अनुरोध किया।
इसके बाद FIFA की अनुशासन समिति ने एक मैच के निलंबन को स्थगित कर दिया, जिससे बालोगुन बेल्जियम के खिलाफ मुकाबले के लिए उपलब्ध हो गए। FIFA ने कहा कि यह फैसला उसके अनुशासन नियमों के तहत लिया गया है, जिसमें कुछ परिस्थितियों में सजा के अमल को निलंबित करने का अधिकार दिया गया है।
हालांकि, इस फैसले की कई देशों और फुटबॉल अधिकारियों ने आलोचना की। UEFA और बेल्जियम फुटबॉल संघ ने सवाल उठाया कि क्या किसी खिलाड़ी के लिए नियमों में ऐसा बदलाव निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रभावित नहीं करता। आलोचकों का कहना है कि खेल के फैसले राजनीतिक प्रभाव से दूर रहने चाहिए।
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने केवल फैसले की समीक्षा की मांग की थी और अंतिम निर्णय FIFA की स्वतंत्र समिति ने लिया। वहीं आलोचक इस बात पर बहस कर रहे हैं कि एक बड़े राजनीतिक व्यक्ति के हस्तक्षेप के बाद आया फैसला खेल प्रशासन की स्वतंत्रता पर कितना असर डाल सकता है।
यह विवाद एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि अंतरराष्ट्रीय खेलों में नियमों की समानता और संस्थाओं की स्वतंत्रता कैसे बनाए रखी जाए।