अंजली गुप्ता
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
वृंदावन, 10 मार्च।
वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने भूत-प्रेत को लेकर लोगों के मन में उठने वाले सवालों पर अपनी आध्यात्मिक राय साझा की है। उन्होंने कहा कि भूत-प्रेत जैसी चीजों को लेकर लोगों में कई तरह की धारणाएं होती हैं, लेकिन इनका संबंध मुख्य रूप से आत्मा और कर्म से जुड़ा माना जाता है।
प्रेमानंद महाराज के अनुसार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा को शांति नहीं मिलती या उसके कुछ अधूरे कर्म रह जाते हैं, तो वह भटकती हुई अवस्था में रह सकती है। इसी स्थिति को आम भाषा में लोग भूत या प्रेत कह देते हैं।
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आत्मा अमर होती है और शरीर छोड़ने के बाद भी उसका अस्तित्व समाप्त नहीं होता। यदि व्यक्ति के मन में अत्यधिक मोह, क्रोध या अधूरी इच्छाएं रह जाएं, तो आत्मा को शांति प्राप्त करने में समय लग सकता है।
प्रेमानंद महाराज ने यह भी कहा कि मनुष्य को डरने के बजाय अपने जीवन में अच्छे कर्म करने चाहिए। अच्छे कर्म और ईश्वर भक्ति से आत्मा को शांति मिलती है और ऐसी स्थितियों से बचा जा सकता है।
उन्होंने लोगों से अंधविश्वास से दूर रहने और आध्यात्मिक जीवन की ओर ध्यान देने की सलाह दी।