नई दिल्ली: भारत की बिजली वितरण कंपनियों ने वित्त वर्ष 2024-25 में उल्लेखनीय वित्तीय सुधार दर्ज करते हुए ₹2,701 करोड़ का लाभ कमाया है। यह उपलब्धि 2013-14 में दर्ज ₹67,962 करोड़ के घाटे के मुकाबले बिजली वितरण क्षेत्र की वित्तीय स्थिति में बड़े बदलाव को दर्शाती है।
अधिकारियों के अनुसार, Revamped Distribution Sector Scheme (RDSS) जैसे सुधारों और बिजली वितरण कंपनियों के बकाया भुगतान से जुड़े नियमों ने डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन पहलों का उद्देश्य वितरण नेटवर्क को मजबूत करना, तकनीकी एवं वाणिज्यिक नुकसान कम करना और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाना है।
इसी अवधि में देश में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 957 किलोवाट-घंटे से बढ़कर 1,460 किलोवाट-घंटे हो गई। बिजली उत्पादन में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई। जहां 2014-15 में वार्षिक बिजली उत्पादन करीब 1,110 अरब यूनिट था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 1,847.9 अरब यूनिट पहुंच गया।
सरकार का कहना है कि वितरण क्षेत्र की बेहतर वित्तीय सेहत और बढ़ती बिजली उपलब्धता देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की मजबूत नींव तैयार कर रही है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं, उद्योगों, कारोबार और अन्य आर्थिक गतिविधियों को अधिक भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
अधिकारियों के मुताबिक, बिजली क्षेत्र में क्षमता और वितरण व्यवस्था को मजबूत करना भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के साथ-साथ आर्थिक विकास और उत्पादकता को गति देने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
अमित कुमार पांडेय