लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
भारत के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र की गतिविधियों में जून 2026 के दौरान नरमी देखने को मिली। मैन्युफैक्चरिंग PMI (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) घटकर 54.2 पर पहुंच गया, जो पिछले चार वर्षों का दूसरा सबसे निचला स्तर है। हालांकि, 50 से ऊपर का PMI अब भी विनिर्माण गतिविधियों में विस्तार का संकेत देता है।
रिपोर्ट के अनुसार, जून में नए ऑर्डर और उत्पादन दोनों की वृद्धि दर धीमी रही। इसका सबसे अधिक असर कैपिटल गुड्स (पूंजीगत वस्तु) क्षेत्र में देखा गया, जहां मांग में अपेक्षाकृत कमजोरी दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, निर्यात मांग में उतार-चढ़ाव और घरेलू बाजार की धीमी गति के कारण विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार प्रभावित हुई है। इसके बावजूद कंपनियों ने रोजगार सृजन और उत्पादन क्षमता बनाए रखने के प्रयास जारी रखे।
आर्थिक जानकारों के अनुसार, यदि आने वाले महीनों में घरेलू मांग और औद्योगिक निवेश में सुधार होता है, तो मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की वृद्धि दोबारा गति पकड़ सकती है। फिलहाल, जून के आंकड़े संकेत देते हैं कि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र विस्तार की स्थिति में तो है, लेकिन उसकी रफ्तार पहले की तुलना में धीमी पड़ गई है।