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शिक्षक दिवस : 71% लोग रोजाना कुछ नया सीखते है, आज के नए डिजिटल गुरु यूट्यूब से

जैसे अब यूट्यूब एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन चुका है, जहां लोग सिर्फ मनोरंजन के लिए ही नहीं जाते बल्कि नॉलेज हासिल करने भी जाते हैं। फिटनेस से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक की तैयारी के लिए यूट्यूब पर अपलोड वीडियो नॉलेज पाने का एक बड़ा जरिया बन चुके हैं।

Deepak Chauhan 05-09-2019 15:12:19



देश में हर साल पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। ये दिन होता है गुरुओं के प्रति आभार प्रकट करने का। उनका आशीर्वाद लेने का। बदलते दौर में शिक्षक की भूमिका भी बदल रही है। लोगों के सीखने का तरीका भी बदल रहा है और सीखने, सिखाने का माध्यम भी बदल रहा है।

जैसे अब यूट्यूब एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन चुका है, जहां लोग सिर्फ मनोरंजन के लिए ही नहीं जाते बल्कि नॉलेज हासिल करने भी जाते हैं। फिटनेस से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक की तैयारी के लिए यूट्यूब पर अपलोड वीडियो नॉलेज पाने का एक बड़ा जरिया बन चुके हैं। नई जनरेशन के लिए यूट्यूब ही शिक्षक की भूमिका निभा रहा है। यूट्यूब पर 71% यूजर्स कुछ सीखने आते हैं।


डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन।

नए दौर में शिक्षकों की क्या भूमिका है, यूट्यूब का क्या रोल है और नया सिनेरियो कैसा है जानिए इस रिपोर्ट में। दैनिक भास्कर ने इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डीपी सिंह, यूट्यूब की ओरिजिनल कंटेंट की हेड सुजैन डेनियल (यूएस), पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के भतीजे और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व महानिदेशक अरविंद चतुर्वेदी और टेक एक्सपर्ट सिद्धार्थ राजहंस (अमेरिका) से बात की।


यूट्यूब कैसे निभा रहा शिक्षक की भूमिका, समझें इन दो किस्सों से...


पहला किस्सा

नाम : दीपक नायक

क्या सीखा : स्ट्रॉबेरी की खेती का तरीका


दीपक नायक। 

क्या कहते हैं : दीपक ने बताया कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने वेब डिजाइनिंग का काम शुरू किया। काम अच्छा चल रहा था और इंटरनेशनल क्लाइंट्स भी बन गए थे, लेकिन मन गांव की जमीन पर स्ट्रॉबेरी की खेती करने का था। पहले महाराष्ट्र जाकर स्ट्रॉबेरी की खेती के बारे में पता किया। फिर भी पूरी जानकारी नहीं मिल सकी थी तो यूट्यूब को ही शिक्षक बना लिया। यूट्यूब से नोट्स तैयार किए। विशेषज्ञों से बात की और स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू कर दी। 2 से 5 लाख का निवेश पहली बार में हुआ। 50वें दिन फल आ गए थे। जितने पैसे लगे थे, उतने निकल गए लेकिन आगे के लिए सीख बहुत बड़ी मिल गई। अब फलों के एक्सपोर्ट का काम कर रहे हैं। वे कहते हैं कि, यूट्यूब से सबकुछ तो नहीं लेकिन बहुत कुछ सीखा जा सकता है। किसी भी विषय के बारे में आप काफी हद तक जानकारी यूट्यूब से जुटा सकते हैं। जिनके पास ज्ञान लेने का कोई साधन नहीं है, उनके लिए यूट्यूब सबसे बड़ा शिक्षक बन चुका है।


दूसरा किस्सा

नाम :  प्रद्युम्न शांडिल्य

क्या सीखा : म्यूजिक इंस्ट्रुमेंट्स


प्रद्युम्न शांडिल्य।

क्या कहते हैं : एमपी पीएससी की तैयारी कर रहे प्रद्युम्न कहते हैं कि मैंने म्यूजिक इंस्ट्रुमेंट्स प्ले करना यूट्यूब से ही सीखा। बिना कहीं जाए और पैसे खर्च किए बिना मेरा काम हो गया। सीखने के बाद यूट्यूब पर ही चैनल भी बना लिया और अब तक इससे 200 डॉलर से ज्यादा कमा चुका हूं। आज के दौर में यूट्यूब ही सबसे बड़ा शिक्षक है लेकिन यहां थोड़ा अलर्ट रहने की जरूरत है। बहुत सी नकारात्मक और गलत जानकारी वाली चीजें भी यूट्यूब पर आती हैं। ऐसे में जरूरी है कि सही जानकारी को ही अपनाया जाए और फेक न्यूज के चक्कर में न पड़ें।


यूट्यूब जानकारी के लिए अच्छा लेकिन शिक्षक का विकल्प नहीं...


डॉ डीपी सिंह

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डीपी सिंह ने बताया कि शिक्षक का कोई विकल्प नहीं हो सकता, क्योंकि शिक्षक सिर्फ एक फिजिकल एंटिटी नहीं हैं, बल्कि वह एक व्यक्तित्व, ज्ञान, आचरण, गरिमा, मर्यादा, व्यवहार एक रूप भी हैं। शिक्षक रोल मॉडल होते हैं। ये अपेक्षाएं कभी भी तकनीकी विकल्प पूरी नहीं कर सकते।

डॉ सिंह कहते हैं कि, यूट्यूब और दूसरी ऐसी तकनीकें हमारी अतिरिक्त जानकारी का जरिया हो सकती हैं लेकिन यह कभी गुरू की भूमिका में नहीं आ सकते। अब शिक्षक को गुरू के रूप में परिवर्तित होना चाहिए। गुरू सिर्फ कक्षा में पाठ्यक्रम से जुड़ी ही बात नहीं करते बल्कि जीवन संग्राम के लिए विद्यार्थी को तैयार करते हैं। सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। डॉ सिंह का मानना है कि यूट्यूब पर जो भी लोग एजुकेशनल वीडियो अपलोड करते हैं, उन्हें पहले उसे लेकर अच्छे से शोध कर लेना चाहिए।

पूरी जिम्मेदारीपूर्वक यह काम करना चाहिए क्योंकि आप जो वीडियो डाल रहे हैं और जो जानकारी उसमें दे रहे हैं, वे कई लोगों का भविष्य या तो बना सकती है या बिगाड़ सकती है। इसलिए तथ्यपूर्ण और सही जानकारी ही यूट्यूब पर डालनी चाहिए। 


यूट्यूब शिक्षक नहीं बल्कि कोचिंग को सप्लीमेंट कर रहा...

पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के भतीजे और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व महानिदेशक अरविंद चतुर्वेदी कहते हैं कि, संभवत यूट्यूब कोचिंग को सप्लीमेंट कर रहा है, शिक्षक को नहीं। शिक्षक की भूमिका तो धीरे-धीरे बहुत कम हो ही चुकी है। अब शिक्षक कक्षा में अपने विषय से जुड़ी पुस्तक उठाकर ही पढ़ा देते हैं। दायित्व बोध का अभाव है। ऐसा नहीं होता तो क्यों छात्र-छात्राएं स्कूल छोड़कर कोचिंग ज्वॉइन करते?


अरविंद चतुर्वेदी। 

आज से 40 साल पहले तो कोई कोचिंग क्लास नहीं थी, क्योंकि पहले मजबूत पर्यवेक्षण तंत्र था, जो अब लगभग समाप्त हो चुका है। केरल में तो 73 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जो स्कूल में प्रवेश लेते हैं, लेकिन पढ़ाई करने कोचिंग क्लास में जाते हैं। शिवराज सरकार के समय मध्य प्रदेश से ही खबर आई थी कि सरकार ने ये माना है कि 31 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिन्हें पढ़ाना आता ही नहीं। सरकार ने इन्हें ट्रेंड करने के लिए कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला में शामिल होने के लिए आवदेन मंगाए लेकिन महज 37 शिक्षकों ने सीखने में रूचि दिखाई। कोचिंग संस्थानों का भी पैटर्न फिक्स है। वे समग्र विकास नहीं करते बल्कि एक निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के उद्देश्य से सिलेबस तैयार करते हैं और वही बच्चों को रटवाते हैं।

यूट्यूब सहित शिक्षा के किसी भी स्रोत का स्वागत है, लेकिन यह काम जिम्मेदारी से होना चाहिए और बच्चों की नींव कभी यूट्यूब से मजबूत नहीं हो सकती। अच्छी नींव के निर्माण के लिए अच्छे शिक्षक की जरूरत होती है। सरकार को सबसे पहले अच्छे शिक्षक बनाने पर जोर देना चाहिए। अच्छे शिक्षक बन गए तो पूरा समाज अच्छा हो जाएगा। 


यूट्यूब दुनिया सबसे बड़ा वीडिया कंटेंट एग्रीगेटर

यूट्यूब ओरिजिनल कंटेंट की हेड सुजैन डेनियल (अमेरिका) ने भास्कर के लिए दिए खास मैसेज में कहा कि यूट्यूब दुनिया का सबसे बड़ा वीडियो कंटेंट एग्रीगेटर है। मुझे यह जानकार बहुत खुशी है कि भारत के लोग यूट्यूब कंटेंट को पसंद कर रहे हैं, जो उन्हें ग्लोबल ट्रेंड्स और ऑडियंस से भी जोड़ रहा है। यूट्यूब पर वीडियो की प्रकृति और यूजर द्वारा बनाए गए प्रारूप कंटेंट की एक विस्तृत श्रृंखला उपभोक्ताओं के लिए लाते हैं।

यूट्यूब ओरिजिनल कंटेंट की हेड सुसैन डेनियल।

यह बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ सकता है। ब्रांड्स का निर्माण कर सकता है। नॉलेज को बढ़ा सकता है और दुनिया में क्या चल रहा है, उसे और बारीकी से समझने में मदद कर सकता है। वीडियो कंटेंट का सबसे ज्यादा आकर्षक फॉर्म है और भारत सबसे बड़े कंज्युमर और क्रिएटर है। इसी वजह है कि यूट्यूब लगातार भारत में अपना आधार बढ़ा रहा है।

यूट्यूब ओरिजिनल की हेड होने के नाते मैं बताना चाहूंगी कि, यूट्यूब ओरिजिनल ऐसा सीरीज फॉर्मेट है, जो यूट्यूब प्रीमियम में ओरिजिनल कंटेंट उपलब्ध करता है। यूट्यूब वेब सीरीज भी बना रहा है और प्रोफेशनल वीडियो कंटेंट को बढ़ाया जा रहा है। हम इंडियन ऑडियंस के लिए अपनी प्रीमियम ऑफरिंग बढ़ाना चाहते हैं, इससे यूजर का इंगेजमेंट और ज्यादा बढ़ेगा। इस प्यार के लिए मैं आभारी हूं। 


71% व्यूअर्स कुछ सीखने आते है

यूट्यूब भारत में कितना पॉपुलर हो रहा है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि गूगल के स्वामित्व वाले यूट्यूब के भारत में 26 करोड़ एक्टिव यूजर्स हो चुके हैं।

यूट्यूब पर यूजर्स सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं आते। 

एक इवेंट में गूगल की साउथ ईस्ट एशिया और इंडिया की मार्केटिंग डायरेक्टर सपना चौधरी ने खुलासा किया था कि, 71% ऑनलाइन व्यूअर्स कुछ सीखने के लिए यूट्यूब पर जाते हैं।

उन्होंने कहा था कि कामकाजी माता-पिता से लेकर पेशेवर लोग तक किसी इरादे से यूट्यूब पर जाते हैं। शोध में सामने आया है कि जिस तरह से लोग यूट्यूब का इस्तेमाल करते हैं, उससे वह कुछ नया सीखना चाहते हैं।

एजुकेशनल कंटेंट क्रिएट करने वालों को अवॉर्ड दे रहा यूट्यूब

यूट्यूब पर अब हजारों-लाखों लोग कुछ सीखने आ रहे हैं। इसी कारण कंपनी भी ऐसे यूजर्स को प्रोत्साहित कर रही है, जो विषयों, कोर्स, अंग्रेजी सीखने से संबंधित वीडियो यूट्यूब पर अपलोड कर रहे हैं।


सिद्धार्थ राजहंस, टेक एक्सपर्ट। 

यूट्यूब ने हाल ही में दिल्ली में 8 क्रिएटर्स को अवॉर्ड दिया है। यह अवॉर्ड यूट्यूब लर्निंग फंड के जरिए हाई क्वालिटी एजुकेशनल कंटेंट क्रिएट करने के लिए दिया गया। इसमें इंग्लिश लैंग्वेज ट्रेनिंग, एन्वायरमेंटल साइंसेज, पॉलिटिकल साइंस, जेनेटिक्स, केमेस्ट्री आदि से जुड़ा कंटेंट था।

पिछले साल ही यूट्यूब सीईओ सुसान वोज्स्की ने एजुकेशनल कंटेंट लाने वाले क्रिएटर्स को प्रोत्साहित करने के लिए 20 मिलियन डॉलर के फंड की घोषणा की थी।

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