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आखिर क्यों सेक्सोलॉजिस्ट शर्मा रहे है मरीजों से बात करने में

Deepak Chauhan 14-05-2019 16:46:26



डॉक्टर प्रकाश कोठरी के मरीज़ों को बेहतरीन सेक्स की चाहत है और इसे स्वीकारने में उन्हें कोई संकोच नहीं है. भारत के टॉप सेक्स विशेषज्ञ के रूप में मशहूर, मुंबई स्थित डॉक्टर कोठारी का कहना है कि पुराने ज़माने की तरह चुपके-चुपके इस बारे में खुसफुस करने वाली आदत ने अब करवट बदल ली है। कोठारी ने प्रेस को बताया, ‘जब मैंने अपना पेशा शुरू किया (40 साल पहले) लोग अपनी सेक्स लाइफ के बारे में बात करने में बहुत शर्माते थे. लेकिन आज लोग चाहे ये मानने को राज़ी न हों कि वे सेक्स विशेषज्ञ से मिल रहे हैं, पर यह तो सच है कि वे अपनी सेक्स लाइफ के बारे में बात करने से संकोच नहीं कर रहे.

कोठारी कहते हैं, ‘महिलाएं भी अब इस बारे में खुल कर बात कर रही हैं, मेरे क्लिनिक में हर 10 में से कम से कम चार तो महिलाएं ही होती हैं. वे यह कहने में बिलकुल नहीं शर्मातीं कि वे अपने पति से असंतुष्ट हैं और यदि मैं उनका इलाज न कर पाऊं तो वे अपनी शादी तोड़ देंगी.’


भारत में सेक्स या यौन क्रियाओं को अच्छा नहीं माना जाता, लेकिन अब इसकी परतें खुलती हुई नज़र आ रही हैं. अधिक से अधिक लोग बिना किसी शर्म या झिझक के अब योग्य डॉक्टरों से अपनी सेक्स लाइफ के बारे में बातचीत करना चाहते हैं, जैसे कि बांझपन, हस्तमैथुन की लत या सिर्फ सेक्स में असंतुष्टि- वे सभी चीज़ें जिन्हें अक्सर सुझाव भरे और गुमनाम लेखकों वाले लेखों में पाया जाता था। नतीजा यह हुआ कि सेक्सोलॉजी या यौन चिकित्सा, जो कि मेडिकल शिक्षा का वह अंग है, इसे पारंपरिक कोर्स जितनी तवज्जो नहीं मिली. लेकिन अब इसका उदय होता नज़र आ रहा है. उन डॉक्टरों को काफी मुनाफा हो रहा है जो सालों पहले अपने आप को गोपनीय रखकर खुश थे। 

डॉक्टर कोठारी जो कि मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल में यौन चिकित्सा डिपार्टमेंट के हेड थे, अब अपने घर में ही स्थित क्लीनिक में एक परामर्श के लिए ही 20,000 रुपये वसूल करते हैं.

उन्होंने मीडिया को बताया, ‘जब मैंने यह पेशा शुरू किया, तब मेरी फीस सिर्फ दस रुपये थी.’ इसके अलावा उन्हें एक प्रसिद्ध हिंदी अख़बार के कॉलम ‘काम का कॉलम’ में एक सवाल का जवाब देने के 5000 रुपये मिलते हैं। गुरुग्राम की ई-साइक्लिनिक (ePsyclinic) नामक ऑनलाइन मानसिक चिकित्सा मंच पर हर रोज़ 7 से 10 लोग 900 रुपये प्रति घंटे की दर से अपनी सेक्शुअल चिंताओं पर वीडियो परामर्श प्राप्त करते हैं.


आंकड़ों में बढ़ती तेजी 

दिल्ली में स्थित एक कंपनी लाइब्रेट (Lybrate) जो कि डॉक्टर-मरीज़ के लिए बना एक ऑनलाइन प्लेटफार्म है, ने एक साल से भी कम समय में यौन स्वास्थ्य से जुड़े सवालों में 75 प्रतिशत से ज़्यादा वृद्धि देखी है। वहीं जहां 2017 में लाइब्रेट के पास यौन स्वास्थ्य से जुड़े 12 लाख सवाल आए थे, 2018 में अब तक इनका आंकड़ा 21 लाख पहुंच गया है। आपको बता दें कि लाइब्रेट के पास जहां 5000 हृदय रोग विशेषज्ञ हैं, वहीं यौन रोग विशेषज्ञों की संख्या 4500 है। पॉलिसीबाजार द्वारा चलाए जा रहे ऑनलाइन मेडिकल परामर्श पोर्टल (Docprime.com) के अनुसार, ऐप सेंटर के रोज़ाना 2000 संदेशों में से 10 प्रतिशत तो केवल सेक्स संबंधित चिंताएं और यौन स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं। भारी रिस्पांस मिलने के बाद ऑनलाइन मेडिकल परामर्श देने वाला ऐप डॉक्सकॉल (DocsCall) भी अब ज़्यादा यौन विशेषज्ञों की नियुक्ति करने वाला है। डॉक्सकॉल के सीईओ डॉक्टर भरत कंसल ने कहा, ‘हैरानी की बात यह है कि सेक्सोलॉजी के मामले किसी भी अन्य मामले के मुकाबले बढ़ते जा रहे हैं. हमारे पास आने वाले कुल सवालों का 40 प्रतिशत इसी यौन समस्या से संबंधित है. फ़िलहाल हमारे पास सिर्फ तीन ही सेक्सोलॉजिस्ट हैं जिनके ऊपर बहुत सारे सेक्स संबंधी सवालों के जवाब देने का बोझ पड़ा हुआ है.’ऑनलाइन ऐप्स पर परामर्श मांगने वाले ज़्यादातर प्रश्न हस्तमैथुन की लत, शीघ्रपतन, गुप्तांगों के साइज, उत्तेजना में कमी, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन और शुक्राणु की कम संख्या होने को लेकर होते हैं। 


यौन चिकित्सकों का सच?

पूरी दुनिया में यौन चिकित्सा को एक अलग शास्त्र नहीं माना जाता. नतीजतन दूसरे विषयों की तरह यौन चिकित्सा में विस्तृत ट्रेनिंग नहीं मिल पाती। भारत में तरह-तरह के डॉक्टर्स सेक्सोलॉजिस्ट बन जाते हैं. यूरोलॉजी (मूत्रविज्ञान), साइकेट्री (मानसिक रोग विज्ञान), एंड्रोलॉजी (नर विज्ञान) और जेनिटर यूरिनरी मेडिसिन, और अन्य के स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स भारत में सेक्सोलॉजिस्ट का काम भी करते हैं। हालांकि इन डॉक्टरों की छवि ज़्यादातर सेक्स-लाइफ सलाहकार की ही होती है, लेकिन सेक्सोलॉजिस्ट सेक्स टॉयज बनाने के साथ-साथ ट्रामा पीड़ित और सेक्स वर्कर्स के साथ भी काम करते हैं। कुछ विदेशी संस्थान जैसे कि अमेरिकन बोर्ड ऑफ़ सेक्सोलॉजी, सर्टिफाइड सुपरवाइजर्स थेरेपी, दि अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ़ सेक्शुअलिटी एडुकेटर्स, काउंसलर्स एंड थेरेपिस्ट्स (AASECT) उन डॉक्टरों के लिए सर्टिफिकेशन कोर्स चलाते हैं जिनके पास वैध डिग्रियां हैं जैसे एमबीबीएस, बैचलर इन होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएचएमएस) और आयुर्वेद मेडिसिन और सर्जरी में स्नातक इत्यादि। वे डॉक्टर जिनके पास कोई वैध डिग्री न हो या उन दवाइओं का परामर्श दें जो उनके दायरे से बाहर हैं, को नीम हकीम का दर्जा दिया जाता है। कॉउंसिल ऑफ़ सेक्स एजुकेशन एंड पैरेंटहुड इंटरनेशनल (CSEPI) के संजय जी देशपांडे ने प्रेस को बताया, ‘किसी भी प्रतिष्ठित संस्थान से प्रमाण पत्र ज़्यादा लाभदायक होता है क्योंकि इससे मरीज़ पता लगा लेते हैं कि कौन डॉक्टर है और कौन नीम-हकीम.’ आपको बता दें कि CSEPI 300 डॉक्टरों का एसोसिएशन है जो सेक्सोलॉजिस्ट का काम भी करता है.


विज्ञापनों में नहीं होते डॉक्टर 

भारत में सेक्सोलॉजिस्ट की संख्या का कोई ठोस आंकड़ा नहीं है. देशपांडे ने कहा, ‘यह पता लगा पाना मुश्किल है क्योंकि ऐसे बहुत सारे डॉक्टर हैं जो सेक्सोलॉजिस्ट का काम भी करते हैं और नीम हकीमों की संख्या भी बहुत ज़्यादा है.’देशपांडे ने बताया, ‘हमारे सदस्यों में उन डॉक्टरों की संख्या ज्यादा है जिनके पास यूनानी, आयुर्वेद, होमियोपैथी में वैध डिग्री है या जिन्होंने अपने कार्यकाल में यौन चिकित्सा का काम किया हो. उनमें से ज़्यादातर डॉक्टर सिर्फ सेक्सोलॉजिस्ट नहीं हैं.’चेन्नई के डॉक्टर नारायण रेड्डी यौन संबंधित बीमारियों को लेकर विशेष क्लीनिक खोलने वाले सबसे पहले मेडिकल पेशेवर हैं. उनका कहना है कि भारत में सिर्फ सेक्सोलॉजी केंद्रित प्रैक्टिस करने वाले मात्र 10 डॉक्टर भी नहीं हैं। उन्होंने बताया, ‘भारत में मुझे लेकर सिर्फ पांच या सात ही सेक्सोलॉजिस्ट हैं जो मेडिकल विज्ञान का इस्तेमाल कर सेक्स संबंधी रोगों को दूर करते हैं. बाकी सब या तो डबलिंग (डॉक्टर और सेक्सोलॉजी दोनों की प्रैक्टिस एक साथ करने वाले) हैं या नीम हकीम होते हैं.’अमेरिकन कॉलेज ऑफ़ सेक्सोलॉजिस्ट्स से प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद रेड्डी एशिया ओशिनिया फेडरेशन फॉर सेक्सोलॉजी के अध्यक्ष भी चुने गए हैं. यह संस्था ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, यूरोप, टर्की, इजराइल और लैटिन अमेरिका के यौन चिकित्सकों का नेतृत्व करती है। जब रेड्डी ने चालीस साल पहले यौन चिकित्सा शुरू की, उन्हें शुरुआती छह महीनों में एक भी मरीज़ नही मिला. आज उनके क्लीनिक में अपॉइंटमेंट लेने के लिए हफ्ते भर का इंतज़ार करना पड़ता है या कई बार तो किसी वरिष्ठ डॉक्टर से सिफारिश भी लानी पड़ती है.


खैर रेड्डी इस बात का अफ़सोस जताते हैं कि जहां उनको यौन चिकित्सा को स्पेशलिटी बनाने में बहुत सारी बाधाओं का सामना करना पड़ा, वहीं ज़्यादातर भारत के यौन चिकित्सक नीम हकीम ही हैं जो विज्ञापन दे-देकर जादुई ताकतों से बीमारी ठीक करने के लंबे-लंबे वादे करते हैं। वे कहते हैं कि ‘जो कोई भी विज्ञापन करता है, वह डॉक्टर नहीं हो सकता. मेडिकल कॉउंसिल ऑफ़ इंडिया के नियमों के तहत डॉक्टर विज्ञापन नहीं कर सकते, न मैं प्रचार कर सकता हूं, न ही मैं कोई गारंटी दे सकता हूं.’रेड्डी ने कहा, ‘यह पेशा नीम हकीमों की वजह से दूषित हो गया है क्योंकि वे ज़्यादा दिखाई पड़ते हैं. क्योंकि रोगी उनमें और वैध डॉक्टरों में भेद नहीं कर पाते, वे हकीमों की ओर खिंचे चले जाते हैं.’दिल्ली स्थित एक रोगी ने इस पर सहमति जताते हुए अपनी आपबीती सुनाई. उन्होंने कहा कि उन्हें एक यौन चिकित्सक ढूंढने में कितनी तकलीफ हुई। उन्होंने कहा, ‘हाल ही में मेरे शरीर पर चकत्ते पड़ने लग गए, तो मुझे लगा कि शायद कोई यौन संक्रमण हो गया होगा. तब मैंने दिल्ली में यौन चिकित्सक की तलाश शुरू की. मैंने इंटरनेट पर ऐसे बहुत सारे डॉक्टरों को खोजा जो अपने आप को सेक्सोलॉजिस्ट कह रहे थे. लेकिन जब मैं उनमें से एक को मिला, तो मुझे लगा कि दाल में कुछ काला है.’‘आखिरकार मुझे उत्तम नगर में एक सही डॉक्टर मिल ही गया जो मेरे घर से 28 किलोमीटर दूर था. उस डॉक्टर ने इस बात की पुष्टि कर दी कि मुझे कोई यौन संक्रमण नहीं हुआ था.’


दिल्ली अभी दूर है

डॉक्टर रेड्डी का कहना है कि चिकित्सा के बाकी क्षेत्रों के समान दर्जा पाने के लिए यौन चिकित्सा का सफर काफी लंबा रहा है. वे उस समय को याद करते हैं जब लोग उनके यौन चिकित्सक बनने की इच्छाओं की खिल्ली उड़ाया करते थे। ‘सबने मुझे बोला कि हृदय रोग जैसे क्षेत्र में आगे जाओ, वहां सम्मान मिलता है. जिस अस्पताल में मैं तैनात हुआ उन्होंने मुझे प्रजनन जीवविज्ञानी (रिप्रोडक्टिव बायोलॉजिस्ट) का दर्जा दिया, न कि सेक्सोलॉजिस्ट का जो मैं असल में था.’रेड्डी ने बताया, ‘मेरे सहकर्मी भी मेरा मज़ाक उड़ाया करते थे. वे अक्सर मुझे मेरे रोगियों के मामलों के बारे में पूछ कर आंख मारा करते थे.’आज भी सेक्सोलॉजिस्ट बनने का विकल्प चुनना कोई आसान काम नहीं है. ‘हम आज भी उस दिन का इंतज़ार कर रहे हैं जब ‘सेक्स’ और सेक्सोलॉजिस्ट जैसे शब्द विवादस्पद नहीं होंगे. कम से कम मेडिकल साइंस में तो नहीं. कई युवा डॉक्टर सेक्सोलॉजिस्ट बनना तो चाहते हैं लेकिन मां-बाप के दबाव में ‘सम्मानित विशेषज्ञ’ बन बैठते हैं.’


फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग के डॉक्टर राजिंदर यादव जो सेक्सोलॉजिस्ट का काम भी करते हैं, ने अपने मरीज़ों की संख्या में दोगुना इजाफा देखा है.


नवविवाहितों से लेकर संतानहीन दंपति और व्यक्तिगत रूप से लिंग बदलवाने की सर्जरी करवाने का विचार कर रहे लोग- हर कोई डॉक्टर यादव के केबिन के बाहर लंबा इंतज़ार करता है, भले ही डॉक्टर यूरोलॉजिस्ट (मूत्रविज्ञान विशेषज्ञ) क्यों न हो। यादव ने बताया कि जब उन्होंने यह पेशा शुरू किया तभी से लांछन लगने शुरू हो गए. ‘मेरे माता-पिता लिए यह एक चिंता का विषय था क्योंकि उन्हें इस बात से दिक्कत थी कि मैं यौन चिकित्सा की पैक्टिस कर रहा था.’डॉक्टर कोठारी ने 10 साल तक तो अपनी मां को यह बताया ही नहीं कि वे क्या प्रैक्टिस कर रहे थे. उन्होंने कहा, ‘इस पेशे से जुड़े कलंकों के चलते मैं अपने क्लीनिक के बाहर एक बोर्ड भी नहीं लगवा पाया.’


इन सभी पेशेवरों का मानना है कि सेक्सोलॉजी ने अभी तक सम्मान प्राप्त नहीं किया है, चाहे इसके ग्राहक कितना भी बढ़ क्यों न गए हों.


कोठारी ने कहा, ‘कोई भी मेडिकल विद्यार्थी जब सेक्सोलॉजिस्ट बनने की सोचता है, तब उसको भी इन्हीं बाधाओं का सामना करना पड़ता है. अब जो बदलाव आया है वह सिर्फ ग्राहकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी के रूप में ही आया है.’श्वेता गुप्ता, आईवीएफ चेन मेडिकवर फर्टिलिटी की क्लीनिकल डायरेक्टर का कहना है कि सेक्सोलॉजिस्ट को ‘रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स या थेरेपिस्ट’ कहने से इस पेशे पर लगे धब्बे धुल सकते हैं। वे कहती हैं कि ‘कुछ मामलों में तो ऐसा होता है कि मरीज़ को सेक्स करना आता ही नहीं है या वे अपनी शादी को ठीक से नहीं निभा पाते. कुछ मामले ऐसे भी हैं जहां रोगी को लगता है कि वे प्रजनन के हिसाब से ठीक से सेक्स नहीं कर रहे. ऐसे मामलों में हमें यौन चिकित्सकों की आवश्यकता है, लेकिन यह अब भी कलंकित है और इसके लिए हमें सबसे पहले रोगी को तैयार करना पड़ता है.’


वहीं CSEPI यौन चिकित्सा को एक भिन्न अनुशासन का रूप देने के लिए प्रयास कर रही है ताकि मेडिकल विद्यार्थी इसमें विशेषज्ञ बन सकें.


इसके लिए CSEPI ने एमसीआई, जो एक मेडिकल पेशे की राष्ट्रीय प्रहरी है, को लिखित में अपनी बात कही थी. लेकिन सितंबर में ही एमसीआई ख़त्म हो गई और नेशनल मेडिकल कमीशन के नाम से शायद फिर से उभर कर आने की तैयारी में है। देशपांडे ने कहा, ‘हम नए कमीशन के कार्य शुरू करने का इंतज़ार कर रहे हैं. हम नए सिरे से एक चिट्ठी लिखेंगे जिसमें हम कानून निर्माताओं से आग्रह करेंगे कि यौन चिकित्सा को मेडिकल साइंस का एक भिन्न अनुशासन माना जाए.’साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु की डॉक्टर एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी, सेक्शुअल मेडिसिन को लेकर एक प्रमाणित कोर्स शुरू करने के लिए राज़ी भी हो गई है. ‘यह कोर्स 6 महीनों में शुरू हो जाएगा’.

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