16 साल के प्यार या दोस्ती पर बोली कटरीना पाक को चेतावनी देते हुए राजनाथ ने कहा 1965 और 71 की गलती दोहराई तो कर देंगे खंड-खंड इस सवाल पर उड़ा सोनाक्षी सिन्हा का मजाक प्याज़ की कीमते हुई ज्यादा आम आदमी भी परेशान फीस को लेकर MeToo पर बोलीं कृति सेनन बेहतरीन कलाकारों से बनी साधारण फिल्म परस्थानम कॉपीराइट इश्यूज के चलते सोशल मीडिया से ड्रीम गर्ल का गाना डिलीट भारत की पहली प्राइवेट ट्रेन की बुकिंग हुई शुरू सभा सम्बोधित करते हुए 370 पर बोले अमित शाह : एक देश में दो विधान, दो निशान और 2 प्रधान नहीं चलेंगे कुछ इस हाल में है महाराष्ट्र की बड़ी पार्टिया यूपी और उत्तराखंड में कैनबिस रिसर्च को सरकार की मंजूरी कमांडो की गाड़ी पर फायरिंग कर बदमाश हुए फरार चिन्मयानन्द केस में रेप पीड़िता भी हो सकती है गिरफ्तार विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप के फाइनल से हटे दीपक पुनिया चोट रही कारण 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए मोदी ने तोडा प्रोटोकॉल '' प्रिय चाची, चिंता मत करो : बाबुल सुप्रियो Elections Updates: 21 अक्टूबर को महाराष्ट्र और हरियाणा में वोटिंग अमेरिका: चीनी टूरिस्टों को ले जा रही बस हादसे का शिकार 3199 मीटर की ऊंचाई पर स्तिथ सरेउल झील पर्यटकों के आकर्षण का है केंद्र सोने की कीमतों में गिरावट जारी

संकट में पपराजी

Deepak Chauhan 08-05-2019 16:13:17



सैंटियागो बायज़ 1990 के दशक की शुरुआत से ही पपराज़ी (मशहूर और चर्चित हस्तियों का पीछा करने वाले पत्रकार) रहे हैं। एक ऐसा काम जो किसी जासूस से काम के जैसा ही होता है। पपराजी और किसी जासूस में सिर्फ क्लाइंट के मुद्दे का फर्क होता है बाकि तो काम करने का ढंग दोनों का सामान ही होता है। क्युकी ही दोनों ही अपने अपने काम में अपनी पहचान को गुप्त रख कर साथ ही अपने आप को भी गुप्त रख कर ही काम करते है। इस को करने में व्यक्तिगत तौर पर कुछ स्किल्स की जरुरत होती है। 



पपराजी के स्किल्स 

हाथ में कैमरा लिए हुए वह न्यूयॉर्क के कई नामी और मशहूर लोगों के विवाहेतर संबंधों, बच्चे के जन्म, मृत्यु, नये प्यार और ब्रेकअप के गवाह रहे हैं। बायज़ जैसे पपराज़ी के लिए रोजी-रोटी कमाना आसान नहीं है। उनके पास शहर के मशहूर लोगों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। साथ में ड्राइवरों, दुकानदारों और रेस्तरां कर्मचारियों का नेटवर्क होना चाहिए, जो किसी सेलिब्रिटी के दिखने पर उन्हें तुरंत बता दें. कई बार सेलिब्रिटीज़ ख़ुद ही सोशल मीडिया पर कोई संकेत छोड़ देते हैं। नामी-गिरामी लोगों के बारे में कोई जानकारी मिलते ही वे फोटोग्राफरों को उनके बारे में सचेत करते हैं। कई बार वे किसी एजेंसी से भी फोटोग्राफर किराये पर लेते हैं। ज़्यादातर तस्वीरों का कोई मोल नहीं होता, लेकिन नये बच्चे की कोई तस्वीर या नये प्रेमी-प्रेमिका को चूमते हुए किसी सेलिब्रिटी की तस्वीर या उनकी शादी की तस्वीर रातोंरात तकदीर बदल सकती है। वर्षों की ट्रेनिंग और सेलिब्रिटीज़ के बारे में ज्ञान के बावजूद बायज़ की आमदनी निश्चित नहीं है.



पपराजी जिनके हाथो में 

पपराज़ी की किस्मत कुछ मुट्ठी भर लोग निर्धारित करते हैं, जैसे कि पीटर ग्रौसमैन, जो 2003 से 2017 के बीच अस (Us) साप्ताहिक के फोटो एडिटर थे। ग्रौसमैन ने कभी पपराज़ी के साथ सीधे काम नहीं किया. बायज़ जैसे फोटोग्राफर अपनी तस्वीरें एक एजेंसी को बेचते हैं जिसका तालमेल ग्रौसमैन जैसे फोटो संपादकों से होता है। फोटोग्राफर को तस्वीर की कीमत का 20 से 70 फीसदी हिस्सा मिलता है. यह उसकी पहचान और एजेंसी से उसके मोलभाव पर निर्भर करता है। वरिष्ठ, कुशल और प्रतिभाशाली पपराज़ी फोटोग्राफर बेहतर शर्तों पर काम करते हैं. इनमें किसी एक एजेंसी को ही एक्सक्लूसिव तस्वीरें बेचने की शर्त भी शामिल होती है। टैबलॉयड की दुनिया में तहलका मचा देने वाली एक्सक्लूसिव तस्वीरों को बड़ी कीमत मिल सकती है। ग्रौसमैन ने अभिनेत्री क्रिस्टेन स्टीवर्ट और रूपर्ट सैंडर्स (स्नोव्हाइट और हंट्समैन के शादीशुदा डायरेक्टर) की तस्वीरों के लिए छह अंक में रकम अदा की थी। उन तस्वीरों में स्टीवर्ट सैंडर्स को कसकर भींचे हुई थीं। ग्रौसमैन ने पपराज़ी फोटोग्राफी के अच्छे दिन देखे हैं. 2000 के दशक की शुरुआत में उन्होंने "जस्ट लाइक अस" तस्वीरों को लोकप्रिय बनाया था। कॉफी खरीदते या पेट्रोल भरवाते सेलिब्रिटीज़ की तस्वीरें पत्रिका के पाठकों के बीच हिट साबित हुई थीं। जल्द ही, कई सारे अखबारों-पत्रिकाओं में ऐसी तस्वीरें छपने लगीं, जिससे इंडस्ट्री के सुनहरें दिनों की शुरुआत हुई. यह वही समय था जब पेरिस हिल्टन, ब्रिटनी स्पीयर्स और लिंडसे लोहान की लोकप्रियता शिखर पर थी। 



किमत तस्वीर की 

तस्वीर की कीमत इस बात से निर्धारित होती थी कि सेलिब्रिटी क्या कर रही है और क्या वह तस्वीर एक्सक्लूसिव है। पपराज़ी के सुनहरे दिनों में कोई एक्सक्लूसिव "जस्ट लाइक अस" तस्वीर 5,000 डॉलर से लेकर 15,000 डॉलर तक में आराम से बिक जाती थी। तुरंत पैसे कमाने के लिए कई नये फोटोग्राफर इस पेशे में आए. वे कानून तोड़ने के लिए तैयार थे. उन्होंने पपराज़ी के पेशे की और ज़्यादा बदनामी करायी और सेलिब्रिटीज़ और उनके बच्चों को तंग करने की हद तक चले गए। ग्रौसमैन ने सभी से संभलकर रहने, तस्वीरों के लिए कम भुगतान करने और फोटो के लिए कानून तोड़कर ख़ुद की और दूसरों की ज़िंदगी दांव पर न लगाने की अपील की, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। लेकिन वैश्विक वित्तीय संकट और ऑनलाइन मीडिया के उदय ने सब बदल दिया. डिजिटल मीडिया ने सेलिब्रिटीज़ की तस्वीरों की मांग बढ़ाई लेकिन तस्वीरों के भाव कम कर दिए। फोटो एजेंसियों ने अपना बिज़नेस संगठित किया या फिर समेट लिया. जो बच गए उन्होंने अपना बिज़नेस मॉडल बदल लिया। पत्रिकाओं से हर तस्वीर के लिए पैसे लेने की जगह उन्होंने सदस्यता सेवा का प्रस्ताव रखा, जिसमें प्रकाशक एजेंसी की जितनी मर्ज़ी उतनी फोटो छापने के लिए आज़ाद होते हैं। इस मॉडल में पपराज़ी फोटोग्राफर को सदस्यता शुल्क का एक छोटा हिस्सा मिलता है, जो इस पर निर्भर करता है कि महीने में उसकी कितनी तस्वीरें छपीं। इसका मतलब है कि कोई एक्सक्लूसिव तस्वीर जिसके लिए पहले 5,000 डॉलर से लेकर 15,000 डॉलर तक मिलते थे, उसे अब सिर्फ़ 5 से 10 डॉलर मिलते हैं। पपराज़ी की आमदनी घटती ही जा रही है. अब मोटा पैसा कमाने के लिए उन्हें दुर्लभ तस्वीर खींचने की जरूरत है। 



काम रिस्क वाला 

किसी सेलिब्रिटी का दिखना संयोग से होता है. इसीलिए बायज़ की आमदनी कभी कम कभी ज़्यादा होती रहती है। वित्तीय अर्थशास्त्री जोखिम को दो व्यापक श्रेणियों में बांटते हैं- एक है व्यक्तिकेंद्रित (idiosyncratic) जोखिम, जो किसी संपत्ति विशेष या कंपनी विशेष से जुड़ा होता है और दूसरा प्रणालीगत (systematic) जोखिम, जो बड़ी व्यवस्थाओं को प्रभावित करता है। पपराज़ी के सामने पहले किस्म का जोखिम रहता है।  सेलिब्रिटी आज क्या करेंगे, वह ए-लिस्ट वाले दोस्तों के साथ रहेंगे या डी-लिस्ट वाले दोस्तों के साथ- ये सब चीजें भी उनकी आमदनी पर असर डालती हैं। यदि किसी सेलिब्रिटी की लोकप्रियता घटती है तो उसकी तस्वीरों का भाव भी घट जाता है। इस तरह की तस्वीरें स्टॉक (शेयर) की तरह होती हैं. उनकी कीमत फोटोग्राफर के सही समय पर सही शॉट क्लिक करने पर निर्भर करती है। जोखिम का प्रबंधन करने के लिए पपराज़ी फोटोग्राफर अक्सर टीमें बना लेते हैं, टिप्स शेयर करते हैं और कई बार तस्वीरों की रॉयल्टी भी बांट लेते हैं। दूसरे तरह का जोखिम पूरी व्यवस्था को प्रभावित करता है. मिसाल के लिए 2008 की मंदी जिसने पूरी दुनिया के शेयर बाज़ार को धराशायी कर दिया था। प्रणालीगत जोखिम की घटनाएं अक्सर तब होती हैं जब मंदी या चुनाव परिणाम जैसी घटनाओं के कारण बड़ी आर्थिक बाधाएं आती हैं। ऐसे जोखिम का प्रबंधन मुश्किल होता है और इनका असर भी ज़्यादा ख़तरनाक होता है। मिसाल के लिए, अगर पूरा स्टॉक मार्केट ही डूब जाए तो आपकी नौकरी जाने और शेयर पोर्टफोलियो के एक साथ ध्वस्त हो जाने का जोखिम होगा। पपराज़ी के साथ ऐसा ही जोखिम रहता है।  मंदी के दिनों में लोगों ने टैबलॉयड पत्रिकाएं खरीदनी बंद कर दीं। पिछले 10 सालों में पपराज़ी के लिए दूसरे तरह का जोखिम गंभीर हो गया है। सभी के लिए पैसे बनाना मुश्किल हो गया है।  कई पपराज़ी ने यह पेशा ही छोड़ दिया है। 30 साल तक इस पेशे में रहने के बाद बायज़ 2018 की गर्मियों में पत्नी और बेटे के साथ नए काम की तलाश में डोमिनिकन गणराज्य वापस चले गए। 



आर्थिक सकंट में पपराजी 

प्रकाशन उद्योग में आए बदलावों से एक औसत पपराज़ी फोटोग्राफर की रोजी-रोटी ख़तरे में है। फोटोग्राफर अस्थायी गठजोड़ करके अपने ऊपर बढ़े व्यक्तिकेंद्रित जोखिम का प्रबंधन कर रहे हैं, लेकिन उनकी नौकरियों के लिए ख़तरा बने प्रणालीगत जोखिम का प्रबंधन ज़्यादा मुश्किल है। वे संघ बना सकते हैं और एजेंसियों से बेहतर शर्तों की मांग कर सकते हैं, लेकिन ऐतिहासिक रूप से उन्हें एक-दूसरे से सहयोग करने में परेशानी होती है। पपराज़ी अकेले नहीं हैं जिनकी नौकरियों के अस्तित्व पर ख़तरा मंडरा रहा हो। लोग अपने आर्थिक भविष्य को लेकर पहले से अधिक चिंतित रहते हैं क्योंकि वे श्रम बाज़ार में प्रणालीगत जोखिम को महसूस कर रहे हैं। कुछ दशक पहले तक ज़्यादातर रोजगार जोखिम व्यक्तिकेंद्रित थे, जैसे- बॉस के साथ झगड़ा, पद के अनुकूल न होना, कंपनी का खराब प्रबंधन आदि। नौकरी जाने पर उसी तरह की दूसरी नौकरी पाने की संभावना रहती थी. श्रमिक अपने संघ बनाते थे, एक-दूसरे से जुड़ते थे और बेहतर तनख़्वाह और सुविधाओं की मांग करते थे। तब उनको भरोसा था कि उनकी कुशलता की जरूरत है. श्रम बाज़ार में उतार-चढ़ाव आते थे लेकिन जोखिम प्रबंधन मुश्किल नहीं था। मौजूदा अर्थव्यवस्था में प्रणालीगत जोखिम बड़ा है। संभावना यह भी है कि तकनीक- रोबोट और मशीनी बुद्धि- आपकी नौकरी छीन ले या आपको नये तरह की कुशलता हासिल करने के लिए मजबूर कर दे। यदि आप मंदी में अपनी नौकरी गंवाते हैं तो हो सकता है कि आपको वैसी ही नौकरी कभी न मिले। ख़तरा सब पर है, लेकिन बायज़ जैसे पपराज़ी फोटोग्रोफर के लिए ख़तरा सिर तक पहुंच गया है। यह जोखिम वाला पेशा है जिसमें जोखिम बढ़ता ही जा रहा है और जोखिम का पुरस्कार लगातार कम हो रहा है। 

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :