भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर के बयान पर ओवैसी का पलटवार कहा ये PM के अभियान को एक चुनौती धोनी नहीं लेंगे संन्यास टीम मैनेजमेंट नहीं चाहती टीम में खालीपन छत्तीसगढ़ से हज के लिए जाने वाले यात्रियों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण मुंबई के बांद्रा स्थित MTNL बिल्डिंग में लगी आग,मौके पर दमकल की 4 गाड़ियां चंद्रयान- 2 की हुई सफल लॉन्चिंग, पूरी दुनिया ने देखी भारत की तरक्की सोशल मीडिया पर प्रियंका चोपड़ा का स्मोकिंग करते हुए फोटो वायरल, यूजर्स ने जमकर किया ट्रोल नवोदय विद्यालय की छठीं कक्षा की छात्रा ने की ख़ुदकुशी, पिता ने जताया संदेह एम्स सहित सभी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए केवल नीट परीक्षा अनिवार्य राष्ट्रीय राजमार्ग के सभी टोल प्लाजा पर जल्द ही बनेंगे फास्टैग लेन रेड लाइट जम्प कर मर्सिडीज ने दूसरी कार काे मारी टक्कर, कार में सवार PM के सुरक्षा जवान की मौत SC ने दिए बाबरी विध्वंस मामले में 9 महीने के अंदर फैसला सुनाने के आदेश 150 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से बॉलिंग करने वाले नवदीप सैनी टी-20 और वन डे टीम में चयन टीम इंडिया से खेलेंगे ये दो भाई दीपक चाहर और राहुल चाहर उत्तराखंड के 133 गांवों में पिछले 3 महीने नहीं पैदा हुई एक भी बेटी, जिला प्रशासन में मचा हड़कंप फैज़ाबाद के विश्वविद्यालय में दी जा रही है कृषि उत्पादन सम्बन्धी जागरूकता मोदी-योगी टी-शर्ट पहनकर कांवड़ ला रहे हैं शिवभक्त RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन बन सकते है IMF के नए मैनेजिंग डायरेक्टर यूपी और राजस्थान में रविवार रात बिजली गिरने से 36 लोगों की मौत 95% तक पानी की बर्बादी रोकने के लिए नल की बनाई टोंटी दिल्ली के किदवई भवन में लगी आग

मैं तुम्हें हराऊंगा पर तुम मुझे जिताते रहना - यूँ ही

30-04-2019 21:38:06



                                                               मैं तुम्हें हराऊंगा पर तुम मुझे जिताते रहना - यूँ ही!  -आशीष मान

भारतीय राजनीति के सन्दर्भ में ये बात कुछ ठीक सी लगने लगी है। यहाँ का लोक तंत्र सही मायने में "प्रजा तंत्र" ही है। एक तरफ प्रजा और एक तरफ कुछेक राजा। राजा सिर्फ राज करने के लिए और प्रजा राजा के मनोरंजन और पोषण के लिए। सात दशकों में प्रजा ने राजा को इतना सशक्त कर दिया की अब तो वो नियम, नीति, विधि और विधान से काफी ऊपर पहुँच गया है और ये सभी नियम कानून प्रजा के लिए छोड़ दिया जिससे कि किताबों में लिखी लोकतंत्र की परिभाषा जीवित रहे - किसके लिए?...राजाओं की सल्तनत बरक़रार रखने के लिए। किसी की बेशर्मी और किसी की नादानी - ये राजा बड़ी बड़ी बातों में प्रजा को उलझाकर उनका निरंतर दोहन कर रहे हैं और प्रजा जो स्वयं को शिक्षित करती है और अनवरत परिश्रम के पश्तात भी इनके सम्मोहन में फंसी हुई है। ना जाने क्या सम्मोहन है इन राजाओं के चीखते चिल्लाते, शोर मचाते, वादों से भरे भाषणों में जो हर पल काम कर रहे हैं, और प्रजा है की असहाय सी इन शोर मचाते शब्दों के पुलिंदों में फंसी अपनी असहायता को अपना मुस्तक़बिल समझे जी रही है। बड़े बड़े ओहदों पर बैठे लोग भी अपनी सारी समझदारी और ज्ञान को ताख पर रखके यह कहते हुए वर्ष दर वर्ष वही गलती कर रहे हैं जो बेचारा एक उतना शिक्षित न हुआ व्यक्ति। राजा प्रत्येक 5 वर्ष पश्चात् आता है और उतनी ही निर्लज्जता और आत्मविश्वास से वादों का बेसुरा राग छेड़ प्रजा को सम्मोहित कर ये कहता है, कि देख तुझे इस प्रजातंत्र को जीवित रखने क़ेलिए मुझे जितना होगा ही, तुझे जीतने का अवसर एक दिन अवश्य आएगा, इसी उम्मीद में एक बार और हारने में क्या हर्ज़ है? मोशी मिशन इन सम्मोहित करनेवाले भाषणों की असली बेसुरी धुन को सुन सकता है और सुना भी सकता है। अब राजाओं की सल्तनत समाप्त, प्रजा तंत्र को लोक तंत्र में परिवर्तित होना ही होगा। समाज काफी सशक्त है और हमारे पास कई नेता छोटे छोटे गाओं में, कस्बों में और शहरों में तत्पर हैं वो सब कुछ कर दिखाने को जो इस देश की आज ज़रुरत है। मोशी वो मंच देता है जिसपर से जनता अपना राग छेड़ेगी - कि हम स्वयं सक्षम हैं, हम तत्पर हैं...एक प्रयोग को, सामाजिक चेतना क़े योग को। स्वयं हार कर जिताया तुम्हे यदि तुम सही में कुछ करना चाहते हो तो एक बार जिताओ हमें। असल पहचान होगी तुम्हारी यदि हे राजा तुम आने दो हमारी भी बारी। टूट रही है हमारी खामोशी..."खा" ख़त्म अब प्रारब्ध है "मोशी"।

Quotes

" "

Share On Facebook

Comments

Replied by foo-bar@example.com at 2019-04-29 05:54:39

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :