16 साल के प्यार या दोस्ती पर बोली कटरीना पाक को चेतावनी देते हुए राजनाथ ने कहा 1965 और 71 की गलती दोहराई तो कर देंगे खंड-खंड इस सवाल पर उड़ा सोनाक्षी सिन्हा का मजाक प्याज़ की कीमते हुई ज्यादा आम आदमी भी परेशान फीस को लेकर MeToo पर बोलीं कृति सेनन बेहतरीन कलाकारों से बनी साधारण फिल्म परस्थानम कॉपीराइट इश्यूज के चलते सोशल मीडिया से ड्रीम गर्ल का गाना डिलीट भारत की पहली प्राइवेट ट्रेन की बुकिंग हुई शुरू सभा सम्बोधित करते हुए 370 पर बोले अमित शाह : एक देश में दो विधान, दो निशान और 2 प्रधान नहीं चलेंगे कुछ इस हाल में है महाराष्ट्र की बड़ी पार्टिया यूपी और उत्तराखंड में कैनबिस रिसर्च को सरकार की मंजूरी कमांडो की गाड़ी पर फायरिंग कर बदमाश हुए फरार चिन्मयानन्द केस में रेप पीड़िता भी हो सकती है गिरफ्तार विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप के फाइनल से हटे दीपक पुनिया चोट रही कारण 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए मोदी ने तोडा प्रोटोकॉल '' प्रिय चाची, चिंता मत करो : बाबुल सुप्रियो Elections Updates: 21 अक्टूबर को महाराष्ट्र और हरियाणा में वोटिंग अमेरिका: चीनी टूरिस्टों को ले जा रही बस हादसे का शिकार 3199 मीटर की ऊंचाई पर स्तिथ सरेउल झील पर्यटकों के आकर्षण का है केंद्र सोने की कीमतों में गिरावट जारी

पूजन कर्म में खासतौर पर कुंकुम क्यों जरूरी होता है?

Khushboo Diwakar 17-05-2019 16:07:54



  • कुंकुम का तिलक मान-सम्मान का और इसका लाल रंग प्रेम, उत्साह, साहस का प्रतीक है

जीवन मंत्र डेस्क। पूजा में भगवान को अर्पित की जाने वाली चीजों का धार्मिक के साथ ही वैज्ञानिक महत्व भी है। ये सभी चीजें हमारे जीवन से जुड़ी हुई हैं। भगवान को जो सामग्रियां चढ़ाई जाती हैं, उनका भाव यही है कि हम जो भी भगवान को चढ़ाते हैं, उनका फल हमें मिलता है। पूजन कर्म में खासतौर पर कुंकुम का विशेष महत्व है। भगवान को कुंकुम से तिलक लगाया जाता है, हमारे माथे पर कुंकुम लगाते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए कुंकुम से जुड़ी खास बातें...

कुंकुम से जुड़ी खास बातें

  1. सभी मांगलिक कर्मों में जरूरी है कुंकुम

    कुंकुम पूजा की सबसे जरूरी सामग्रियों में से एक है। पूजा के अलावा सभी मांगलिक कर्मों में भी कुंकुम का उपयोग होता है। घर हो या मंदिर हर जगह पूजा की थाली में कुंकुम रखा जाता है। कुंकुम का लाल रंग प्रेम, उत्साह, उमंग, साहस और शौर्य का प्रतीक है। इससे प्रसन्नता का संचार होता है। ग्रंथों में भी इसे दिव्यता का प्रतीक माना गया है।
    > नवदुर्गा पूजा विधान में लिखा है कि कुंकुम कान्तिदम दिव्यम् कामिनीकामसंभवम्।
    > इसका अर्थ यह है कि कुंकुम अनंत कांति प्रदान करने वाला पवित्र पदार्थ है, जो स्त्रियों की संपूर्ण कामनाओं को पूरा करने वाला है।

  2. दैनिक जीवन में कब-कब जरूरी है कुंकुम

    पूजा-पाठ के साथ ही दैनिक जीवन में भी कुंकुम का उपयोग होता है। पुरुष तिलक और महिलाएं कुंकुम की बिंदी लगाती हैं। पुराने समय में राजा जब युद्ध के लिए जाते थे, तब उनकी विजय के लिए प्रतीक के रूप में कुंकुम का तिलक लगाया जाता था। राजतिलक के समय भी तिलक लगाया जाता था। इस परंपरा का आशय ये है कि दायित्व के निर्वहन की शुरुआत कुंकुम से की जाए, क्योंकि कुंकम ही विजय है, दायित्व है और मंगल भी। कुंकुम का तिलक सम्मान का प्रतीक है। ये तिलक हमें जिम्मेदारी का अहसास करता है। 

  3. कुंकुम का वैज्ञानिक महत्व

    आयुर्वेद में कुंकुम को औषधि माना गया है। इसे हल्दी और चूने या नींबू के रस में हल्दी को मिलाकर बनाया जाता है। हल्दी खून को साफ करती है और शरीर की त्वचा का सौंदर्य बढ़ाती है। कुंकुम से त्वचा का आकर्षण बढ़ता है। माथे के आज्ञा चक्र पर कुंकुम की बिंदी लगाई जाती है, इससे मन की एकाग्रता बढ़ती है, मन व्यर्थ की बातों में नहीं भटकता है।

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :